फेफड़े के रोग के नाम और उनके प्रकार – Types of Lung Diseases in Hindi

साँस लेने के लिए फेफड़ों का स्वस्थ होना आवश्यक होता है। वर्तमान में फेफड़ों की बीमारियों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह रोग फेफड़ों के कार्य को प्रभावित कर उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। एक आकड़े के अनुसार फेफड़े की बीमारियाँ महिलाओं को सर्वाधिक प्रभावित करती हैं। फेफड़े के रोग (Lung disease) अनेक कारण से उत्पन्न हो सकते हैं, जिसमें शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन प्रदान नहीं हो पाती है। इस लेख में हमफेफड़ों की बीमारियों के नाम और उनके प्रकार के बारे में चर्चा करेगें।

फेफड़े के रोग के नाम और प्रकार – Types of Lung Diseases in Hindi

फेफड़ों के अलग-अलग भाग (जैसे- वायुमार्ग, ऊतक, रक्त वाहिकाओं, वायुकोष इत्यादि) को प्रभावित करने वाली बीमारियों के आधार पर फेफड़ों के रोग निम्न प्रकार के होते हैं, जैसे:

1. वायुमार्ग रोग – Airway Diseases in Hindi

यह फेफड़े के रोग उन ट्यूब्स (वायुमार्ग) को प्रभावित करते हैं, जो ऑक्सीजन और अन्य गैसों को फेफड़ों के अंदर और बाहर ले जाती हैं। यह रोग आम तौर पर वायुमार्ग में संकुचन या रुकावट का कारण बनते हैं। वायुमार्ग संबंधी फेफड़ों के रोग में निम्न शामिल हैं:

  • अस्थमा (Asthma)
  • क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD)
  • सिस्टिक फाइब्रोसिस (Cystic fibrosis)
  • ब्रोंकाइटिस
  • ब्रोन्किइक्टेसिस (bronchiectasis) इत्यादि।

2. लंग टिश्यू डिजीज – Lung tissue diseases in Hindi

यह रोग फेफड़े के ऊतकों पर घाव या सूजन का कारण बनते हैं, जिससे फेफड़े पूरी तरह से फैलने या फूलने में असमर्थ हो जाते हैं। इससे फेफड़ों के लिए ऑक्सीजन लेना और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ना कठिन हो जाता है। फेफड़ों के ऊतक को प्रभावित करने वाली इस प्रकार की लंग डिजीज में निम्न शामिल हैं:

  • पल्मोनरी फाइब्रोसिस (Pulmonary fibrosis)
  • सारकॉइडोसिस (sarcoidosis)।

3. फेफड़ों के परिसंचरण रोग – Lung circulation diseases in Hindi

यह फेफड़े के रोग रक्त वाहिकाओं में थक्के जमने, घाव पड़ने या सूजन के कारण उत्पन्न होते हैं। फेफड़ों और हृदय की धमनियों को प्रभावित करने वाली प्रमुख बीमारी फुफ्फुसीय उच्च रक्तचाप (Pulmonary hypertension), पल्मोनरी एम्बोली (Pulmonary emboli) है।

4. वायु कोष सम्बन्धी रोग – Alveolar lung diseases in Hindi

एल्वियोली (वायुकोष) फेफड़ों की कार्यात्मक इकाइयाँ हैं। वायुकोशीय फेफड़ों के रोगों (Alveolar lung diseases) में उनको रखा गया है, जो इन इकाइयों को प्रभावित करते हैं। वायुकोष में सूजन और क्षति का कारण बनने वाली फेफड़ों की बीमारियों में निम्न शामिल हैं:

  • निमोनिया (Pneumonia)
  • तपेदिक (Tuberculosis)
  • वातस्फीति (Emphysema)
  • पल्मोनरी एडिमा (Pulmonary edema)
  • न्यूमोकोनियोसिस (Pneumoconiosis)।

इसके अतिरिक्त फेफड़ों की बीमारी के अन्य प्रकार भी हो सकते है, जिनमें शामिल हैं:

फेफड़े के दुर्लभ रोग – Rare lung diseases in Hindi

फेफड़े के दुर्लभ रोग के अंतर्गत निम्न रोग शामिल हैं:

  • पल्मोनरी फाइब्रोसिस (Pulmonary fibrosis) – फेफड़े के ऊतक का क्षतिग्रस्त और दागदार होना।
  • क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) – वायुप्रवाह को अवरुद्ध होना और सांस लेने में तकलीफ होना।
  • अल्फा-1 एंटीट्रिप्सिन की कमी (Alpha-1 Antitrypsin Deficiency) – यह आनुवंशिक विकार है तथा फेफड़ों में संक्रमण का कारण बनता है।
  • पल्मोनरी एल्वोलर प्रोटीनोसिस सिंड्रोम (Pulmonary alveolar proteinosis syndrome) – फेफड़ों में सर्फेक्टेंट (Surfactant) का निर्माण, जिससे वायु कोष (air sacs) या एल्वियोली (alveoli) का अवरुद्ध हो जाना।
  • पल्मोनरी लैंगरहैंस सेल हिस्टियोसाइटोसिस (Pulmonary Langerhans Cell Histiocytosis) – फेफड़े के पैरेन्काइमा (lung parenchyma) के भीतर अनेक गोलाकार या अनियमित आकार की हवा से भरी जगहों का निर्माण होना।
  • पल्मोनरी एल्वोलर माइक्रोलिथियासिस (Pulmonary Alveolar Microlithiasis) – कैल्शियम फॉस्फेट के अनेक छोटे टुकड़ों का वायु कोष (एल्वियोली) में जमा हो जाना।

इंटरस्टीशियल लंग डिजीज – Interstitial Lung Disease in Hindi

इंटरस्टिशियल फेफड़े की बीमारी (ILD) में वह 100 से अधिक क्रोनिक फेफड़ों की स्थितियां शामिल हैं, जो फेफड़ों में घाव का कारण बनती है।

  • एस्बेस्टॉसिस (asbestosis)
  • ब्रोन्कियोलाइटिस ओब्लिटरैनस (bronchiolitis obliterans)
  • कोल वर्कर्स न्यूमोकोनिओसिस (coal worker’s pneumoconiosis)
  • क्रोनिक सिलिकोसिस (chronic silicosis)
  • हाइपर सेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस (hypersensitivity pneumonitis)
  • आइडियोपैथिक पलमोनेरी फ़ाइब्रोसिस (Idiopathic Pulmonary Fibrosis)
  • सारकॉइडोसिस (sarcoidosis)।

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