WBC के प्रकार, कार्य और सामान्य स्तर – WBC Type, Functions and Normal Range in Hindi

WBC क्या होती हैं – What is WBC in Hindi

श्वेत रक्त कोशिकाएं को ल्यूकोसाइट्स (leukocytes) के नाम से जाना जाता है, यह कोशिकाएं संक्रमण से लड़ने में शरीर की मदद करती हैं। प्रतिरक्षा प्रणाली में ल्यूकोसाइट्स की एक मुख्य भूमिका है। व्हाइट ब्लड सेल्स का उत्पादन अस्थि मज्जा (bone marrow) में बनने वाली स्टेम सेल (stem cells) से होता है। प्रति माइक्रोलीटर मानव रक्त में श्वेत रक्त कोशिकाओं की नार्मल रेंज 4000 से 11,000 के बीच होती है। किसी भी व्यक्ति के रक्त में व्हाइट ब्लड सेल्स पाँच प्रकार की होती हैं, तथा प्रत्येक प्रकार की कोशिका का एक विशेष कार्य होता है।

WBC की कमी से होने वाले रोग को ल्यूकोपेनिया (Leucopenia) कहा जाता है। इसके अलावा श्वेत रक्त कोशिकाओं के सामान्य स्तर में वृद्धि को ल्यूकोसाइटोसिस (leukocytosis) के रूप में जाना जाता है।

WBC के प्रकार – WBC ke Type in Hindi

सफेद रक्त कोशिकाओं (ल्यूकोसाइट्स) के दो प्रकार हैं- ग्रैनुलोसाइट्स (granulocytes) और एग्रानुलोसाइट्स (agranulocytes)।

ग्रैनुलोसाइट्स के तीन प्रकार हैं- न्यूट्रोफिल, इओसिनोफिल और बेसोफिल। इसी तरह एग्रानुलोसाइट्स के दो प्रकार हैं- लिम्फोसाइट्स और मोनोसाइट्स। प्रत्येक प्रकार के ग्रैनुलोसाइट और एग्रानुलोसाइट संक्रमण और बीमारी से लड़ने में थोड़ी अलग भूमिका निभाता है।

इस तरह WBC मुख्य रूप से पांच प्रकार की होती हैं:

1. न्यूट्रोफिल – Neutrophils Type of wbc in Hindi

कुल WBC का 55 से 70 प्रतिशत भाग न्यूट्रोफिल का बना होता है। न्यूट्रोफिल कोशिकाएं फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं। रक्त में न्यूट्रोफिल की कमी से न्यूट्रोपेनिया (neutropenia) नामक रोग उत्पन्न होता है न्यूट्रोपेनिया सफेद रक्त कोशिकाओं की कमी (ल्यूकोपेनिया) का एक प्रकार है।

2. लिम्फोसाइट्स – Lymphocytes Basic Type of wbc in Hindi

लिम्फोसाइट्स सफेद रक्त कोशिका का दूसरा सबसे सामान्य प्रकार है। श्वेत रक्त कोशिकाओं में लिम्फोसाइट्स की संख्या न्यूट्रोफिल की अपेक्षा कम होती है यह कोशिकाएं शरीर को वायरल संक्रमण से बचाती हैं। जो रक्त में लिम्फोसाइट्स की कमी के कारण उत्पन्न होने वाले रोग को लिम्फोसाइटोपेनिया कहा जाता है, जो कि ल्यूकोपेनिया एक सामान्य प्रकार है।

3. मोनोसाइट्स – Monocytes Type of wbc in Hindi

व्हाइट ब्लड सेल्स के सभी प्रकार में मोनोसाइट्स (monocytes) सबसे सामान्य कोशिकाएं है। मोनोसाइट्स बैक्टीरिया, कवक और वायरस से लड़ने में शरीर की मदद करती हैं। रक्त में मोनोसाइट्स (monocytes) के सामान्य स्तर में कमी से उत्पन्न होने वाले रोग को मोनोसाइटोपेनिया कहा जाता है। मोनोसाइट्स के सामान्य स्तर में वृद्धि से जो रोग उत्पन्न होता है उसे मोनोसाइटोसिस कहा जाता है।

4. इओसिनोफिल्स – Eosinophils wbc ka Prakar in Hindi

यह सफेद रक्त कोशिकाओं का एक अन्य प्रकार है। इओसिनोफिल्स परजीवी (parasites) से लड़ने में शरीर की मदद करती हैं, तथा अस्थमा जैसी एलर्जी प्रतिक्रियाओं से भी सुरक्षा प्रदान करती हैं। रक्त में इओसिनोफिल्स के सामान्य स्तर की कमी की स्थिति को इओसिनोपेनिया (eosinopenia) के नाम से जाना जाता है। तथा जब प्रति माइक्रोलीटर रक्त में इओसिनोफिल्स कोशिकाओं की संख्या 600 से अधिक होती है, तो इसे इओसिनोफिलिया (eosinophilia) कहा जाता है।

5. बेसोफिल्स – Type of wbc Basophils in Hindi

बेसोफिल्स (basophils), एक अन्य WBC का प्रकार है। बेसोफिल्स एलर्जी से सम्बंधित सूजन की समस्याओं से शरीर को सुरक्षित रखने में मदद करती हैं। एक स्वस्थ व्यक्ति में 0 से 3 बेसोफिल प्रति माइक्रोलीटर रक्त में पाई जाती हैं। अतः जब किसी व्यक्ति के रक्त में बेसोफिल्स (basophils) की कमी आती है, तो इस स्थिति को बासोपेनिया (basopenia) कहा जाता है। और जब रक्त में बेसोफिल्स असामान्य रूप से उच्च होती हैं, तो इस स्थिति को बेसोफिलिया (basophilia) कहा जाता है।

व्हाइट ब्लड सेल्स  का सामान्य स्तर – Normal Values of WBC in Hindi

एक सामान्य वयस्क व्यक्ति में श्वेत रक्त कोशिकाओं का सामान्य स्तर निम्न प्रकार होता है:

  • श्वेत रक्त कोशिका कुल स्तर 4000 से 11000 कोशिकाएं/ माइक्रोलीटर
  • न्यूट्रोफिल – कुल श्वेत रक्त कोशिका का 40 से 70%
  • लिम्फोसाइटों – कुल श्वेत रक्त कोशिका का 22 से 44%
  • मोनोसाइट्स – कुल श्वेत रक्त कोशिका का 0 से 7%
  • इओसिनोफिल्स – कुल श्वेत रक्त कोशिका का 0 से 4%
  • बेसोफिल्स – कुल श्वेत रक्त कोशिका का 0 से 1%

WBC के कार्य – Functions of WBC in Hindi

मानव शरीर में WBC के महत्वपूर्ण कार्य हैं। श्वेत रक्त कोशिकाएं शरीर को संक्रामक से बचाती हैं।, सफेद रक्त कोशिकाएं, जिन्हें ल्यूकोसाइट्स भी कहा जाता है, शरीर से रोगजनकों (pathogens), क्षतिग्रस्त कोशिकाओं, कैंसर कोशिकाओं और विदेशी पदार्थों (foreign matter) की पहचान करने, नष्ट करने और उन्हें शरीर से हटाने का कार्य करती हैं।

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